जब श्री गणेश के प्रति उत्पन्न हुआ आकर्षण गणेश पूजा में तुलसी के पत्तों का उपयोग वर्जित है। इसके पीछे एक कथा है जो इस प्रथा की उत्पत्ति को स्पष्ट करती है। एक बार तुलसी देवी, भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए, गंगा के किनारे भ्रमण कर रही थीं। उसी समय उन्होंने युवा गणेश जी को तपस्या में लीन पाया। उस क्षण श्री गणेश ने अपने समस्त अंगों पर चंदन लगाया हुआ था, गले में पारिजात के फूलों के साथ स्वर्ण-मणि रत्नों के कई हार पहने हुए थे, और कमर पर कोमल रेशमी पीताम्बर धारण किए हुए थे। वह रत्न जड़ित सिंहासन पर विराजमान थे। तुलसी ने उनमें पीताम्बर धारी श्री हरि का स्वरूप देखा। उनके अद्भुत और अलौकिक रूप को देखकर तुलसी को श्री कृष्ण का ध्यान आया और इस रूप को देखकर वह मोहित हो गईं। इसके बाद उन्होंने श्री गणेश को अपना पति चुनने का निर्णय लिया।
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Mar 26, 2025
हरतालिका तीज व्रत में क्रोध और सोने जैसे कई कार्यों को वर्जित किया गया है, इसके कारणों को समझें। Hartalika Teej fast anger and sleeping;
सोने से लेकर खाने तक हर किस्म का नियम है महत्वपूर्ण
सोने और खाने से संबंधित हर नियम का महत्व है। हरतालिका तीज के व्रत में विधि और कठोर नियमों का पालन करना आवश्यक है, जैसा कि पौराणिक कथाओं में बताया गया है। इस व्रत के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हरतालिका व्रत करने वाली महिलाओं के लिए सोना मना है। यह व्रत कुमारी कन्याओं और सुहागिन महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है, लेकिन एक बार व्रत शुरू करने के बाद इसे जीवनभर बनाए रखना अनिवार्य है। केवल एक स्थिति में इस व्रत को छोड़ा जा सकता है, जब व्रत रखने वाली गंभीर रूप से बीमार हो जाएं, लेकिन इस स्थिति में किसी अन्य महिला या उसके पति को यह व्रत करना होगा।
Mar 25, 2025
व्रत एवं पूजन विधि - करवा चौथ व्रत विधि
करवा चौथ
उत्तर-पूर्वी भारत में प्रशिद्ध करवा चौथ के व्रत वैवाहित स्त्रियों में प्रशिद्ध है| यह व्रत निर्जला ही किया जाता है। इस दिन समस्त स्त्रियाँ अपने-अपने पतियों की लम्बी उम्र के लिए भगवान शिव और गौरी की आराधना करतीं है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को मनाया जाता है। भारत के कई स्थानों पर इस पर्व को करवा के नाम से भी जाना जाता है|
करवा चौथ व्रत विधि
श्री करक चतुर्थी का यह व्रत करवा चौथ के नाम से प्रसिद्ध है। पंजाब , उतरप्रदेश , मध्यप्रदेश और राजस्थान का प्रमुख पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपने पति के रक्षार्थ इस व्रत को रखती है। गोधुली की वेला यानी चंद्रयोदय के एक घंटे पूर्व श्री गणपति एवं अम्बिका गोर, श्री नन्दीश्र्वर, श्री कार्तिकेयजी , श्री शिवजी फ्रदेवी माँ पार्वतीजी के प्रतिप , प्रधान देवी श्री अम्बिका पार्वतीजी और
केदारनाथ यात्रा: आस्था, रहस्य और प्रकृति का दिव्य संगम
उत्तराखंड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ मंदिर स्थित है, जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यह मंदिर तीन ओर से केदारनाथ, खर्चकुंड और भरतकुंड पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इसके अतिरिक्त, यहां मंदाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी नामक पांच नदियों का संगम भी है, जिनमें से वर्तमान में केवल अलकनंदा और मंदाकिनी ही बह रही हैं। सर्दियों के मौसम में मंदिर पूरी तरह से बर्फ से ढक जाता है, इस दौरान इसके कपाट बंद कर दिए जाते हैं और बैशाखी के बाद इन्हें खोला जाता है।
केदारनाथ का इतिहास
हिंदुओं के चार प्रमुख धामों में से दो, केदारनाथ और बद्रीनाथ, उत्तराखंड राज्य में स्थित हैं। प्राचीन धार्मिक कथाओं के अनुसार, हिमालय के केदार पर्वत पर भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण ने कठोर तपस्या की थी। उनकी इस तपस्या से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने उन्हें दर्शन दिए। इसके साथ ही, नर और नारायण के अनुरोध पर भगवान शिव ने वहां ज्योतिर्लिंग के रूप में निवास करने का आशीर्वाद भी प्रदान किया। इस प्रकार, केदारनाथ और बद्रीनाथ की धार्मिक महत्ता और उनके पीछे की पौराणिक कथाएँ हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखती हैं।
पूजा में प्रयोग होने वाले कुछ शब्द और उनका अर्थ?
1. पंचोपचार – गन्ध , पुष्प , धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने को ‘पंचोपचार’ कहते हैं।
2. पंचामृत – दूध , दही , घृत , मधु { शहद ] तथा शक्कर इनके मिश्रण को ‘पंचामृत’ कहते हैं।
3. पंचगव्य – गाय के दूध , घृत , मूत्र तथा गोबर इन्हें सम्मिलित रूप में ‘पंचगव्य’ कहते हैं।
4. षोडशोपचार – आवाहन् , आसन , पाध्य , अर्घ्य , आचमन , स्नान , वस्त्र, अलंकार , सुगंध , पुष्प , धूप , दीप , नैवैध्य , ,अक्षत , ताम्बुल तथा दक्षिणा इन सबके द्वारा पूजन करने की विधि को ‘षोडशोपचार’ कहते हैं।
5. दशोपचार – पाध्य , अर्घ्य , आचमनीय , मधुपक्र , आचमन , गंध , पुष्प , धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने की विधि को ‘दशोपचार’ कहते हैं।
Mar 22, 2025
काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़ीं ये 5 बातें शायद ही जानते होंगे आप
वाराणसी में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर की महिमा विश्व प्रसिद्ध है. यह मंदिर गंगा नदी के तट पर विद्यमान है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने निर्वाचन क्षेत्र काशी के दौरे पर थे और उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा की. यहां पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरी बार पीएम पद की शपथ लेने से पहले श्रीकाशी विश्वनाथ से राष्ट्र में शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा.
ऐसे में आइए जानते हैं विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़ी ऐसी 5 बातें जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं.
Mar 10, 2025
हनुमान चालीसा अर्थ सहित (Hanuman Chalisa with Meaning)
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
Shree Guru Charan Saroj Raj, Nij Man Mukar Sudhari,
Barnau Raghuvar Bimal Jasu, Jo dayaku Phal Chari
Budhi heen Tanu Janike, Sumirow, Pavan Kumar,
Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi, Harahu Kalesh Bikaar
Barnau Raghuvar Bimal Jasu, Jo dayaku Phal Chari
Budhi heen Tanu Janike, Sumirow, Pavan Kumar,
Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi, Harahu Kalesh Bikaar
अर्थ
श्री गुरु के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।
हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूं। आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कार दीजिए।
With the dust of Guru's Lotus feet, I clean the mirror of my mind and then narrate the sacred glory of Sri Ram Chandra, The Supereme among the Raghu dynasty. The giver of the four attainments of life.
Knowing myself to be ignorent, I urge you, O Hanuman, The son of Pavan! O Lord! kindly Bestow on me strength, wisdom and knowledge, removing all my miseries and blemishes.
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