कल्पना कीजिए कि दो व्यक्ति किसी अत्यंत सुंदर पर्वतीय स्थान पर खड़े हैं। सामने बर्फ से ढकी चोटियाँ हैं, शीतल हवा बह रही है और चारों ओर अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य फैला हुआ है।
पहला व्यक्ति उस दृश्य को देखकर अत्यंत आनंदित होता है। उसके मन में तुरंत विचार आता है कि काश वह यहाँ अधिक समय रह पाता। वापस लौटने के बाद भी वह बार-बार उसी अनुभव को याद करता है और पुनः उसे पाने की इच्छा करता है।
दूसरा व्यक्ति भी वही दृश्य देखता है। उसे भी अच्छा लगता है। वह भी उस क्षण का आनंद लेता है। लेकिन उसके भीतर कोई विशेष लालसा उत्पन्न नहीं होती। यदि वह स्थान फिर कभी न मिले तो भी वह विशेष रूप से व्यथित नहीं होता।