Showing posts with label Thought. Show all posts
Showing posts with label Thought. Show all posts

Jun 23, 2025

5 का महत्व – भारतीय संस्कृति में पंच का रहस्य

 भारत की सनातन परंपरा में संख्याओं का विशेष महत्व है। इनमें संख्या 5 (पंच) का स्थान अत्यंत विशेष है। पाँच न केवल एक संख्या है, बल्कि जीवन, प्रकृति और धर्म का संतुलन है। चाहे वह शरीर हो, पूजा पद्धति हो या ब्रह्मांड की संरचना — हर जगह ‘पंच’ की झलक मिलती है।


इस लेख में हम जानेंगे “5 का महत्व” भारतीय परंपरा और जीवन के विभिन्न पहलुओं में।


🌿 पंचतत्व – जीवन के पाँच आधार

जीवित शरीर इन्हीं पंचतत्वों से बना है:


पृथ्वी – स्थिरता व आधार


जल – शुद्धता व प्रवाह


अग्नि – ऊर्जा व तेज


वायु – प्राणवायु व गति


आकाश – चेतना व विस्तार

Mar 10, 2025

गीता योग - मोक्ष की प्राप्ति के लिए ध्यान और सेवा (Gita Yoga - Meditation and service to attain salvation)

मोक्ष की प्राप्ति के लिए ध्यान और सेवा का अभ्यास आवश्यक है। ध्यान हमें आत्मा की गहराइयों में ले जाता है, जहाँ हम अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानते हैं। यह एक साधना है, जो मन को एकाग्र करने और आत्मा के साथ जुड़ने में मदद करती है। जब हम ध्यान करते हैं, तो हम अपने भीतर की शांति और संतुलन को अनुभव करते हैं, जो मोक्ष की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

संसार में सुखपूर्वक जीवन यापन के लिए सेवा कार्य अनिवार्य है। सेवा का अर्थ है दूसरों की भलाई के लिए अपने समय, ऊर्जा और संसाधनों का उपयोग करना। जब हम सेवा करते हैं, तो हम न केवल दूसरों की मदद करते हैं, बल्कि अपने भीतर भी एक गहरी संतोष और खुशी का अनुभव करते हैं। सेवा के माध्यम से हम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम होते हैं, जो हमारे जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।

Jan 5, 2025

आध्यात्मिकता के ज्ञान से जाने रोग तथा व्याधि का मनोवैज्ञानिक पहलू


आध्यात्मिकता के ज्ञान से जाने रोग तथा व्याधि का मनोवैज्ञानिक पहलू

मनुष्य का मन जगत नियन्ता का एक अद्भुत आश्चर्य है, वही समस्त जड़ चेतन का कारण भूत है तथा मानव जीवन के समग्र पहलू प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से ही उसी एक केन्द्र के इर्द-गिर्द चक्कर लगा रहे हैं। मनुष्य का अस्तित्व मानसिक संघर्ष से हुआ है, उसके विचारों ने उसका पंच भौतिक शरीर विनिर्मित किया है। अपनी मानसिक अवस्था के कारण प्रत्येक व्यक्ति अपनी बेड़ियाँ दृढ़ करता है तथा अज्ञान तिमिर में आच्छन्न हो ठोकरें खाता फिरता है।

Sep 30, 2021

यदि आप भी करना चाहते हैं दान तो ध्यान रखें ये बात




दोस्तो धन और अन्य वस्तुओं का दान करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। आज भी बहुत से लोग दान करते हैं। दान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है और दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही, जरूरतमंद लोगों को भोजन और अन्य आवश्यक चीजें भी मिल जाती हैं। दान किसे देना चाहिए, इस पर 
अवश्य ध्यान देना चाहिए। जिनके पास पर्याप्त धन और सुख-सुविधाएं हैं, उन्हें छोड़कर उन लोगों की मदद करना चाहिये जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है। आइये आपको एक सच्चे संत की कहानी से बताते  कि दान किसे देना अधिक उचित होता है।