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Jul 9, 2026

गायत्री महा मंत्र - भावार्थ एवं महत्व (Gayatri Maha mantra – Meaning & importance)

 गायत्री महामंत्र - भावार्थ एवं महत्व https://youtu.be/Bk2DMboRWfo


गायत्री महा मंत्र  - ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। 

गायत्री मंत्र का अर्थ : पृथ्वीलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में व्याप्त उस सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करे।

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य: युगदृष्टा ऋषि, साधक, और समाज-संस्कृति के महान निर्माता


भारतीय इतिहास ऋषियों और संतों की गौरवगाथाओं से भरा पड़ा है। लेकिन जब हम आधुनिक युग की ओर दृष्टिपात करते हैं, तो एक ऐसा व्यक्तित्व दृष्टिगोचर होता है जिसने बीसवीं सदी में धर्म, विज्ञान, साधना और समाज सेवा को एक सूत्र में बाँध दिया — वे थे पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य।


उन्होंने न केवल आत्मसाधना के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान दिया, बल्कि अपने लेखन, आन्दोलन और संस्थानों के माध्यम से करोड़ों लोगों को जागरूक किया।
वे ऋषियों की परंपरा में आधुनिक युग के प्रतिनिधि, एक सच्चे युगदृष्टा थे।
प्रारंभिक जीवन
जन्म और परिवार

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का जन्म 20 सितम्बर 1911 को उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित एक छोटे से गाँव आँवलखेड़ा में हुआ। उनके पिता पं. रूपकिशोर शर्मा एक विद्वान, धार्मिक प्रवृत्ति के और सादे जीवन वाले व्यक्ति थे। माता दानवंती देवी एक उच्च विचारों वाली, अत्यंत संयमी और धार्मिक महिला थीं।