जब श्री गणेश के प्रति उत्पन्न हुआ आकर्षण गणेश पूजा में तुलसी के पत्तों का उपयोग वर्जित है। इसके पीछे एक कथा है जो इस प्रथा की उत्पत्ति को स्पष्ट करती है। एक बार तुलसी देवी, भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए, गंगा के किनारे भ्रमण कर रही थीं। उसी समय उन्होंने युवा गणेश जी को तपस्या में लीन पाया। उस क्षण श्री गणेश ने अपने समस्त अंगों पर चंदन लगाया हुआ था, गले में पारिजात के फूलों के साथ स्वर्ण-मणि रत्नों के कई हार पहने हुए थे, और कमर पर कोमल रेशमी पीताम्बर धारण किए हुए थे। वह रत्न जड़ित सिंहासन पर विराजमान थे। तुलसी ने उनमें पीताम्बर धारी श्री हरि का स्वरूप देखा। उनके अद्भुत और अलौकिक रूप को देखकर तुलसी को श्री कृष्ण का ध्यान आया और इस रूप को देखकर वह मोहित हो गईं। इसके बाद उन्होंने श्री गणेश को अपना पति चुनने का निर्णय लिया।
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Mar 26, 2025
Mar 25, 2025
व्रत एवं पूजन विधि - करवा चौथ व्रत विधि
करवा चौथ
उत्तर-पूर्वी भारत में प्रशिद्ध करवा चौथ के व्रत वैवाहित स्त्रियों में प्रशिद्ध है| यह व्रत निर्जला ही किया जाता है। इस दिन समस्त स्त्रियाँ अपने-अपने पतियों की लम्बी उम्र के लिए भगवान शिव और गौरी की आराधना करतीं है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को मनाया जाता है। भारत के कई स्थानों पर इस पर्व को करवा के नाम से भी जाना जाता है|
करवा चौथ व्रत विधि
श्री करक चतुर्थी का यह व्रत करवा चौथ के नाम से प्रसिद्ध है। पंजाब , उतरप्रदेश , मध्यप्रदेश और राजस्थान का प्रमुख पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपने पति के रक्षार्थ इस व्रत को रखती है। गोधुली की वेला यानी चंद्रयोदय के एक घंटे पूर्व श्री गणपति एवं अम्बिका गोर, श्री नन्दीश्र्वर, श्री कार्तिकेयजी , श्री शिवजी फ्रदेवी माँ पार्वतीजी के प्रतिप , प्रधान देवी श्री अम्बिका पार्वतीजी और
Feb 14, 2025
जाने कन्यादान का सही अर्थ एवं वास्तविक महत्व क्या है।
*कन्यादान का वास्तविक अर्थ*
कन्यादान एक पवित्र और महत्वपूर्ण हिंदू विवाह संस्कार है, जिसमें पिता अपनी पुत्री को वर के हाथों में सौंपते हैं। यह संस्कार विवाह के दौरान किया जाता है, जब पिता अपनी पुत्री को वर के साथ बैठाकर, उनके हाथों में हाथ देकर, और एक पवित्र मंत्र का उच्चारण करके कन्यादान करते हैं। यह एक भावनात्मक और आध्यात्मिक क्षण होता है, जिसमें पिता अपनी पुत्री के भविष्य की जिम्मेदारी वर को सौंपते हैं, जो कन्यादान के माध्यम से अब उसकी पत्नी बन जाती है। कन्यादान से वर और वधू के बीच एक पवित्र और आध्यात्मिक संबंध स्थापित होता है। साथ ही कन्यादान से दो परिवारों के बीच एक पवित्र और स्थायी संबंध स्थापित होता है। कन्यादान से समाज में स्थिरता और सामाजिक संरचना को बनाए रखने में मदद मिलती है।
Jan 1, 2025
संकट मोचन हनुमान अष्टक (Sankat Mochan Hanuman Ashtak) (Hindi / English with Meaning)
संकटमोचन हनुमानाष्टक
संकट मोचन हनुमान अष्टक, जिसे हनुमान अष्टक के नाम से भी जाना जाता है, श्री हनुमान को समर्पित एक हिंदी भजन है। संकट मोचन हनुमान अष्टकम (संकट मोचन नाम तिहारो) तुलसीदास द्वारा लिखा गया था। अष्टक, या अष्टकम, का शाब्दिक अर्थ है आठ और प्रार्थना में भगवान हनुमान की स्तुति में आठ छंद होते हैं और भजन एक दोहा के साथ समाप्त होता है। अधिकांशतः हनुमानजी के मंदिरों में, हनुमान चालीसा के बाद इस संकट मोचन हनुमान अष्टक का पाठ किया जाता है। यह मंत्र न केवल इसे बोलने वाले लोगों को लाभ पहुंचाता है, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों को भी लाभ पहुंचाता है। यह मंत्र मानसिक विश्राम में मदद करता है और व्यक्ति के परिवार में शांति की भावना लाता है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से वयस्कों और बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार होता है। ऐसे मामले भी हैं जहां यह मंत्र अदालती मामलों और मुद्दों में सकारात्मक परिणाम लाने में सफल साबित हुआ है। संकट मोचन हनुमान अष्टक का जाप व्यक्ति और उसके प्रियजनों की सामान्य भलाई के लिए किया जाता है। इसके पाठ से सभी बाधाएं आसानी से दूर हो जाती हैं और व्यक्ति को अपने पसंदीदा क्षेत्र में सफलता पाने में कोई बाधा नहीं आती। संकटमोचन हनुमान अष्टक का जाप व्यक्ति की शिक्षा में भी सफलता की गारंटी देता है और लोगों को उनकी इच्छा के अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद करता है।
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