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Jul 10, 2026
Jul 9, 2026
Religious World: आध्यात्मिकता के ज्ञान से जाने रोग तथा व्याधि का मनोवैज्ञानिक पहलू
गायत्री महा मंत्र - भावार्थ एवं महत्व (Gayatri Maha mantra – Meaning & importance)
गायत्री महामंत्र - भावार्थ एवं महत्व https://youtu.be/Bk2DMboRWfo
Jul 8, 2026
युग निर्माण सत्संकल्प: व्यक्तित्व और समाज के उत्थान के लिए 18 सूत्रों की विस्तृत व्याख्या
युग निर्माण सत्संकल्प: व्यक्तित्व और समाज के उत्थान के लिए 18 सूत्रों की विस्तृत व्याख्या
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रतिपादित "युग निर्माण सत्संकल्प" एक ऐसा वैचारिक घोषणापत्र है, जो व्यक्ति के आत्म-परिवर्तन से समाज और युग के रूपांतरण की दिशा दिखाता है। इन अठारह संकल्पों को केवल वचन या नियम की तरह नहीं, बल्कि जीवनशैली की आत्मा मानकर अपनाना चाहिए। यह आलेख प्रत्येक सत्संकल्प को व्यावहारिक उदाहरणों, परिवारिक जीवन से जुड़ी सजीव स्थितियों और समाज सुधार के परिप्रेक्ष्य में विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करता है।
धर्म का आचरण पर स्वामी विवेकानन्दजी का विचार
Jun 16, 2026
ॐ (प्रणव) का रहस्य – वेदों, उपनिषदों और ऋषियों की दृष्टि से भाग–2
अ–उ–म्, तुरीय अवस्था और ब्रह्म का अनुभव
"ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म।"
— भगवद्गीता (8.13)
अब तक हमने क्या जाना?
पिछले भाग में हमने देखा कि—
ॐ कोई सामान्य ध्वनि नहीं, बल्कि प्रणव है।
वेदों का सार ॐ है।
उपनिषदों ने इसे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का प्रतीक कहा।
ऋषियों ने इसे बनाया नहीं, बल्कि समाधि में अनुभव किया।
अब प्रश्न उठता है—
यदि ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड है, तो इसके तीन अक्षर अ–उ–म् ही क्यों?
ऋषियों ने किसी अन्य ध्वनि को क्यों नहीं चुना?